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5. लक्ष्यहीनता और आलस्य (Laziness)

ठाकुर जी के अनुसार, ईश्वर से विमुख होना ही अशांति की जड़ है। जब जीवन में आध्यात्मिकता नहीं होती, तो इंसान भौतिक सुखों के पीछे भागकर अपना मानसिक सुकून खो देता है।

2. संस्कारों का अभाव (Lack of Values) नशा और व्यसन (Addictions) शराब

जीवन तब बर्बाद होने लगता है जब हम अपनी संस्कृति और माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों को भूल जाते हैं। अनुशासनहीन जीवन और बड़ों का अनादर व्यक्ति को सही रास्ते से भटका देता है। 3. नशा और व्यसन (Addictions)

शराब, जुआ या अन्य किसी भी प्रकार का नशा न केवल शरीर को बल्कि पूरे परिवार और भविष्य को नष्ट कर देता है। ठाकुर जी इसे जीवन की बर्बादी का सबसे बड़ा द्वार मानते हैं। 4. अहंकार (Ego) नशा और व्यसन (Addictions) शराब

यह वीडियो श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के एक सत्संग का अंश है, जिसमें वे जीवन की बर्बादी के आध्यात्मिक और व्यवहारिक कारणों पर प्रकाश डालते हैं। उनके प्रवचनों के आधार पर इसके मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं: 1. बुरी संगति (Bad Company)

बिना किसी उद्देश्य के जीना और समय की बर्बादी करना जीवन को अंधकार की ओर ले जाता है। कर्महीन व्यक्ति कभी भी सफल या सुखी नहीं हो सकता। 6. भक्ति से दूरी (Lack of Devotion) नशा और व्यसन (Addictions) शराब

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